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कंसीव करने के बाद नौ महीने की पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी को हेलà¥â€à¤¦à¥€ बनाठरखना किसी चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ से कम नहीं होता है। पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट होने के बाद दिमाग में बस यही आता है कि अब मà¥à¤à¥‡ कà¥â€à¤¯à¤¾ खाना चाहिà¤, कैसे à¤à¤•à¥â€à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करनी चाहिठऔर किन बातों का धà¥â€à¤¯à¤¾à¤¨ रखना चाहिà¤à¥¤
सांस फूलना खासतौर पर पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी की तीसरी तिमाही में नॉरà¥à¤®à¤² बात है और गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥â€à¤¥à¤¾ के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ समय में à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ होता है। कà¥à¤› महिलाओं को गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥â€à¤¥à¤¾ की पहली तिमाही से सांस लेने में दिकà¥â€à¤•त महसूस हो सकती है।अगर सीढ़ी चढ़ने जैसे काम करने पर सांस फूल रहा है तो ये सामानà¥â€à¤¯ बात है, लेकिन अगर आपको असà¥â€à¤¥à¤®à¤¾ जैसी कोई सांस की बीमारी है तो इसकी वजह से आपको परेशानी उठानी पड़ सकती है।यह à¤à¥€ पढ़ें : गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥â€à¤¥à¤¾ में दांत में दरà¥à¤¦ के इलाज के लिठअपनाà¤
घरेलू नà¥à¤¸à¥â€à¤–े
अगर आप पहली बार मां बन रही हैं तो आपके लिठयह जानना और à¤à¥€ जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जरूरी हो जाता है कि हेलà¥â€à¤¦à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के लिठआपको किन बातों का धà¥â€à¤¯à¤¾à¤¨ रखना चाहिà¤à¥¤ यहां हम आपको गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥â€à¤¥à¤¾ को हेलà¥â€à¤¦à¥€ बनाठरखने और नौ महीनों के दौरान शिशॠके सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ विकास के लिठजरूरी टिपà¥â€à¤¸ बता रहे हैं।
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान ही नहीं बलà¥à¤•ि कंसीव करने से पहले और डिलीवरी के बाद à¤à¥€ महिलाओं को अपनी डायट का धà¥â€à¤¯à¤¾à¤¨ रखना होता है। पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• आहार लेने से शिशॠके मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥â€à¤• का सही विकास होने में मदद मिलती है और जनà¥â€à¤® के समय शिशॠका वजन à¤à¥€ ठीक रहता है। संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार से शिशॠमें जनà¥â€à¤® विकार, पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾, मॉरà¥à¤¨à¤¿à¤‚ग सिकनेस आदि से à¤à¥€ बचाव होता है। जंकफूड खाने से बचें।
सांस फूलना खासतौर पर पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी की तीसरी तिमाही में नॉरà¥à¤®à¤² बात है और गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥â€à¤¥à¤¾ के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ समय में à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ होता है। कà¥à¤› महिलाओं को गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥â€à¤¥à¤¾ की पहली तिमाही से सांस लेने में दिकà¥â€à¤•त महसूस हो सकती है।
अगर सीढ़ी चढ़ने जैसे काम करने पर सांस फूल रहा है तो ये सामानà¥â€à¤¯ बात है, लेकिन अगर आपको असà¥â€à¤¥à¤®à¤¾ जैसी कोई सांस की बीमारी है तो इसकी वजह से आपको परेशानी उठानी पड़ सकती है।
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अगर सांस फूलने के साथ कोई अनà¥â€à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ नहीं दिख रहा है तो आपको चिंता करने की जरूरत नहींं है और शिशॠको पà¥â€à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा से परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥â€à¤¤ ऑकà¥â€à¤¸à¥€à¤œà¤¨ मिल रहा है इसलिठशिशॠको कोई नà¥à¤•सान नहीं होगा। गहरी सांस लेने से à¤à¥à¤°à¥‚ण ऑकà¥â€à¤¸à¥€à¤œà¤¨ यà¥à¤•à¥â€à¤¤ खून मिलेगा।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी की पहली तिमाही में सांस फूलने के कारणइस समय à¤à¥à¤°à¥‚ण इतना बड़ा नहीं हà¥à¤† होता है कि उसकी वजह से सांस लेने में दिकà¥â€à¤•त आà¤à¥¤
पेट से फेफड़ों और दिल को अलग करने वाला ऊतक का मसà¥â€à¤•à¥à¤²à¤° बैंड डायफà¥à¤°à¤¾à¤® 4 पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी की पहली तिमाही में 4 सेमी तक बढ़ जाता है। डायफà¥à¤°à¤¾à¤® की मूवमेंट से फेफड़ों में हवा à¤à¤°à¤¨à¥‡ में मदद मिलती है।
डायफà¥à¤°à¤¾à¤® में बदलाव के साथ-साथ पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला को अकà¥â€à¤¸à¤° पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ बढ़ने की वजह से तेज सांसें आने लगती हैं।
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दूसरी तिमाही में गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला को सांस फूलने की दिकà¥â€à¤•त जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सà¥â€à¤ªà¤·à¥â€à¤Ÿ महसूस हो सकती है। गरà¥à¤ में बढ़ रहे à¤à¥à¤°à¥‚ण की वजह से इस समय सांस फूल सकती है। हालांकि, दिल के काम करने के तरीके में कà¥à¤› बदलाव आने के कारण à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ हो सकता है।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में खून की मातà¥à¤°à¤¾ तेजी से बढ़ने लगती है। इस खून को पूरे शरीर और पà¥â€à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा में पहà¥à¤‚चाने के लिठदिल को जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ काम करना पड़ता है।
दिल के जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ काम करने की वजह से पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला को सांस लेने में दिकà¥â€à¤•त हो सकती है।
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पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी की तीसरी तिमाही में शिशॠके सिर की पोजीशन की वजह से सांस लेने में आसानी या और जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दिकà¥â€à¤•त हो सकती है। शिशॠके घूमने और पेलà¥à¤µà¤¿à¤¸ की तरफ आने से पहले उसका सिर पसलियों के अंदर और डायफà¥à¤°à¤¾à¤® पर दबाव महसूस हो सकता है जिससे सांस लेने में दिकà¥â€à¤•त होती है।
नेशनल वà¥à¤®à¥‡à¤‚स हैलà¥â€à¤¥ रिसोरà¥à¤¸ सेंटर के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के 31वें हफà¥à¤¤à¥‡ और 34वें हफà¥à¤¤à¥‡ में इस तरह की सांस फूलने की दिकà¥â€à¤•त होती है।
उबले हà¥à¤ अंडे
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के नौ महीनों में शरीर शिशॠके पोषण और विकास के लिठजी तोड़ मेहनत कर रहा होता है। इस समय में शरीर को परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥â€à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की जरूरत होती है जिसे अंडे से पूरा किया जा सकता है। इससे मां और बचà¥â€à¤šà¥‡ दोनों की पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की आवशà¥â€à¤¯à¤•ता को पूरा किया जा सकता है।
हालांकि, आधे उबले हà¥à¤ (हाफ बॉयल à¤à¤—) या अधपके अंडे खाने से सालà¥â€à¤®à¥‹à¤¨à¥‡à¤²à¤¾ का खतरा रहता है। यह à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का बैकà¥â€à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² संकà¥à¤°à¤®à¤£ है जो आंतों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। इसमें उलà¥â€à¤Ÿà¥€, दसà¥â€à¤¤, à¤à¤‚ठन, बà¥à¤–ार, सिरदरà¥à¤¦ और मल में खून आता है।
कैसी à¤à¤•à¥â€à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करें
सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ और फिट रहने के लिठà¤à¤•à¥â€à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ से बेहतर और कोई तरीका नहीं है। पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में बढ़ने वाले वजन को à¤à¥€ à¤à¤•à¥â€à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ से कंटà¥à¤°à¥‹à¤² किया जा सकता है। विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ की मानें तो नियमित वà¥â€à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® से मां और शिशॠदोनों सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ और सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रहते हैं लेकिन गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥â€à¤¥à¤¾ में सही à¤à¤•à¥â€à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ चà¥à¤¨à¤¨à¤¾ बहà¥à¤¤ जरूरी है।
सपà¥â€à¤¤à¤¾à¤¹ में कम से कम 150 मिनट मॉडरेट इंटेसिंटी à¤à¤•à¥â€à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करें। रोज कà¥à¤› मिनट पैदल चलें। बà¥à¤°à¥€à¤¦à¤¿à¤‚ग à¤à¤•à¥â€à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ से à¤à¥€ फायदा होगा, लेकिन à¤à¤¾à¤°à¥€ वजन उठाने वाली और कठिन वà¥â€à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करने से बचें।
अचà¥â€à¤¦à¥€ आदतें अपनाà¤à¤‚
सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ जीवनशैली का सीधा पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ बचà¥â€à¤šà¥‡ की सेहत पर पड़ेगा। गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला को तंबाकू, सिगरेट और शराब का सेवन नहीं करना चाहिà¤à¥¤ पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में शराब पीने से मां की रकà¥â€à¤¤ वाहिकाओं से à¤à¤²à¥â€à¤•ोहल शिशॠकी रकà¥â€à¤¤ वाहिकाओं में पहà¥à¤‚च सकता है जिससे फीटल à¤à¤²à¥â€à¤•ोहल सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® हो सकता है।
à¤à¤¸à¤¾ पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के नौ महीनों में लगातार शराब पीने से होता है। सिगरेट शिशॠतक पहà¥à¤‚चने वाले ऑकà¥â€à¤¸à¥€à¤œà¤¨ और रकà¥â€à¤¤ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकती है। इसलिठबेहतर होगा कि आप गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥â€à¤¥à¤¾ के दौरान इन सब चीजों से दूर रहें।
सà¥â€à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸
सà¥â€à¤µà¤¾à¤¸à¥â€à¤¥à¥â€à¤¯ का सबसे बड़ा दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ है तनाव यानी सà¥â€à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥¤ सà¥â€à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ का असर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला और उसके बचà¥â€à¤šà¥‡ दोनों पर पड़ता है। मानसिक और शारीरिक तनाव से दूर रह कर पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी और पà¥à¤°à¤¸à¤µ के दौरान कई संà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ जटिलताओं से बचा जा सकता है।
सà¥â€à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ के कारण कंसीव करने में à¤à¥€ दिकà¥â€à¤•त आ सकती है और यहां तक कि पà¥à¤°à¥€à¤®à¥ˆà¤šà¥â€à¤¯à¥‹à¤° लेबर à¤à¥€ हो सकता है। यही वजह है कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिलाओं को खà¥à¤¶ रहने की सलाह दी जाती है।
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